जुलाई 06, 2021

मोर कथा (दो)


 

– आपने एक कुत्ते को इधर से भागते हुए देखा है ?

 - हमने किसी कुत्ते को भागते हुए नहीं देखा ... इस सड़क पर कोई कुत्ता नहीं आता इसलिए मैं अपने कुत्ते को यहाँ घुमाने लाती हूँ ।

- इधर बहुत से मोर हैं और एक कुत्ता उन्हें निशाना बना रहा है ... मैं उस कुत्ते को भगाता रहता हूँ ... पर आज उसने एक मोरनी को मार ही दिया । मैं जबतक पहुँचता मोरनी मर चुकी थी , कुत्ता मेरे डर से भाग तो गया पर मोरनी की लाश को खाने ज़रूर आएगा ... ।

- कहाँ है लाश ?

- उस तरफ वहाँ नीम के पेड़ के पास ... मैं दूसरी दिशा में जाता हूँ इस बीच कुत्ता लाश के पास आए तो उसे खदेड़ दीजिएगा प्लीज़ ।

थोड़ी ही देर में सुबह बदल गयी । उसकी सारी कोमलता मौत की भाप में उड़ गयी । हम मोरनी की लाश की ओर बढ़ रहे थे । नीम के पास दूर से ही वह लाश दिख गयी । इतने सुंदर मोर जिस मोरनी के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हों वह धूल में लुंठित थी । गर्दन की दशा देखकर लग रहा था कि कुत्ते ने उसे खूब झकझोरा होगा । पिलपिली गर्दन से किसी तरह जुड़ा सिर । आँख बंद जैसे कोई पर्दा गिर गया हो ! फ़ौजी जवान दुलकी मारते हुए चले गए , गायें सिर नीचा किए चरती रहीं और दूर से मिट्टी ढोने वाले ट्रेक्टरों के आने जाने की आवाज़ आती रही । वह बदहवास सा लड़का भी दिख रहा था । उसकी बाइक वहीं रुकी हुई थी जहाँ एक कमरा बना हुआ है । वह वहाँ रहने वाले आदमी से हमारी तरह ही कुत्ते के बारे में पूछ रहा होगा ।  

 

-मैं उधर जाती हूँ ... मुझसे यह नहीं देखा जाएगा ।

ये उसके शब्द थे जो मोरों की तस्वीर लेने में मेरी सहायता करती थी और मैं जेब से फोन निकालकर मोरनी  की तस्वीर लेने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था । वह ज्यादा दूर नहीं गयी और मैं लाश की बजाय गायों को देखने लगा । लाशों से हमें घृणा होती है । हम जीवन को इतना महत्वपूर्ण मान लेते हैं कि उससे हीन होते ही एक सुंदर शरीर निरर्थक हो जाता है ।

वह लड़का किसी और दिशा में निकल गया किसी और से उस कुत्ते के बारे में जिसने मोरनी की हत्या की थी । मेरे दिमाग में बार बार मोरनी शब्द कौंध रहा था । और अपने आप मोहित चौहान वाले पहाड़ी गीत की पंक्ति भी बजने लगी – मोरनी मारना , मोरनी गँवाना हो , हो अम्मा एता मोर पिंजरा पवाना हो । वह लड़का कुत्ते की तलाश क्यों कर रहा था जबकि वह मोरनी गँवा चुका है ? इस सवाल का जवाब भी उसने दिया था । लेकिन उसके उत्तर तक पहुँचने का सफ़र अभी बाकी था ।

-वहाँ देखो एक कुत्ता मोरों की ओर बढ़ रहा है ।

वह लड़की नहीं होती तो मैं गायों की ओर ही देखता रह जाता  । कुत्ता घात लगाए हुए शिकारी की तरह बढ़ रहा था जैसे टीवी में जानवरों के शिकार वाले दृश्य में सिंह , बाघ या फिर भेड़िया गर्दन लंबी करके कंधे झुकाये हुए आगे बढ़ते हैं । हम तीनों उस ओर दौड़ पड़े – मैं , लड़की और उसका कुत्ता । लड़की ने अपने कुत्ते को ललकारा । फिर तो शिकारी कुत्ते को भागना ही था । अपने से ड्योढ़े कुत्ते के सामने क्या टिकता । वह भाग खड़ा हुआ । भागता हुआ कुत्ता मोटर साइकिल वाले लड़के को भी दिख गया । उसने अपनी बाइक कुत्ते की ओर दौड़ा दी । अपनी पूंछ दबाकर भागते कुत्ते को हमने अपनी नजरों से ओझल होते देखा ।

-मोर राजा पक्षी होते हैं ... उन्हें भागना नहीं पसंद और शरीर इतना भारी कि उड़ना बोझिल काम लगना स्वाभाविक है ... मोरनियाँ यूँ तो मोर की तरह भारी नहीं होती लेकिन जहाँ मोर वहीं मोरनी , जैसा मोर वही ही मोरनी । इनकी आदत इतनी खराब हो गयी है कि ये संकट के समय भी बड़ी मुश्किल से भाग पाते हैं । शिकारी जानवर इसी बात का फ़ायदा उठाते हैं । झुंड पर हमला किया तो कोई न कोई हाथ लग ही जाएगा ... यह कुत्ता मुझे कई बार घात लगाए दिख गया था ... लाख खदेड़ने के बावजूद आज एक मोरनी का नुकसान हो ही गया ... अच्छा हुआ आप लोगों ने कुत्ते को भगा दिया वरना एक बार उसके मुँह मोर का स्वाद लग जाता तो एक एक कर सारे मोर साफ कर देता ।

मोरनी को मिट्टी में दबा देने का विचार उसी का था लेकिन मिट्टी मैं खोद रहा था । उसके हाथ में वह मृत शरीर था जैसे किसी आत्मीय का होता है । उसे उस शरीर से घृणा नहीं हो रही थी ।

-आप देखिए वहाँ जो ऊँचा टावर दिख रहा है , दूर जो शहर दिख रहा है , वह हाइवे जहाँ से गाड़ियों के गुजरने की आवाज़ें आ रही हैं सब पहले इन मोरों के घर रहे होंगे । मोर ही क्यों दूसरे अन्य जानवर रहे होंगे जो पेड़ पौधों से घिरे हिस्से को अपना घर कहते होंगे । वहाँ अब लोग रहते हैं । उनमें से ही किसी में आप और किसी में मैं रहता हूँ । ये छोटी सी जगह बची है यहाँ कुत्ते इनके पीछे पड़े हैं ।

कहते कहते उसने लाश गड्ढे में डाल दी । वह दुखी था और उसी दुख में उसने अपनी बाइक उठायी और उस ओर निकल गया जिधर से आया था ।

उसका सारा दुख उसके साथ नहीं गया कुछ हमारे पास भी रह गया था । मोरनी के मरने का दुख , उनके घर उजड़ने से लेकर धीरे धीरे खत्म होते जाने का दुख हमारे अपने दुखों से मिलकर और बढ़ गए । मेरे हाथों में मिट्टी लगी थी पर मुझे उससे निजात पाने की जरूरत नहीं महसूस हो रही थी । उस लड़की ने अपने कुत्ते को छोड़ रखा था इसके बावजूद वह कहीं नहीं जा रहा था । उस वातावरण में बस गायों द्वारा घास के पास छोड़ी गयी साँसों की आवाज़ थी ।

यदि कुत्ते को इस मोरनी का मांस खाने से रोकना है तो उसके ऊपर कोई ईंट रखनी होगी ताकि वह इसे खोद न पाये । लड़का चला गया लेकिन अपना यह काम छोड़ गया दुख के हिस्सों के साथ । फ़ौजियों ने अपने अगले चक्कर में मुझे और उस लड़की को इधर उधर ईंट के टुकड़े जुटाते देखा होगा । हमने अपने हिसाब से उस हिस्से को सुरक्षित कर दिया था ।

-यह धरती केवल इंसानों की नहीं थी ...!

लड़की के ये शब्द अब तक लाखों करोड़ों बार दुहराये जा चुके शब्दों से मेल खा रहे थे । यह शमशान वैराग सा था और काफी घिसापिटा भी लेकिन सच भी यही था ।

-इंसान जबतक ख़त्म नहीं होंगे इन जीव जंतुओं का कष्ट जड़ से ख़त्म नहीं होगा ... पता नहीं तब तक कितने जानवर बच पाएंगे ।

उस लड़की के दुख निकलने का रास्ता खोजने लगे थे । मेरे मुँह से अचानक निकल गया

-आपको मेरे घर चलना चाहिए ।

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