जुलाई 19, 2021

परखनली और टेस्ट ट्यूब


हमारे विद्यालय की एक प्रयोगशाला से उन परखनलियों और काँच के अन्य सामानों को निकाला जा रहा था जो टूट गए थे और विद्यार्थियों के उपयोग लायक नहीं बचे थे । मुझे उनमें से एक बीकर काम का लगा । हालाँकि वह लगभग आधा टूट चुका था फिर भी उसके निचले हिस्से में पानी भरकर कुछ नन्हीं मछलियाँ या कोई पौधा अथवा फूल रखे जा सकते थे । मैंने उसे साफ कर उसे एक नन्हें मछलीघर का रूप दे दिया । एक मित्र से बात करते हुए मैंने परखनली शब्द का प्रयोग किया तो वे हँसे । उनकी पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी रहा है इसलिए उन्हें इसके बदले टेस्ट ट्यूब कहना पसंद था और संभव है उन्हें परखनली पता भी न हो । हिंदी माध्यम का विद्यार्थी होने के नाते मेरे लिए यह कोई अनोखा शब्द नहीं रहा कभी । मेरे जैसे अनेक लोग जिन्होंने कभी हिंदी में विज्ञान पढ़ा हो वे परखनली को लेकर उतने ही सहज होंगे जितने कि मैं । इस विश्वास के पीछे का आधार इस शब्द के दुहराव में छिपा है । 

पिछले दिनों कक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर हिंदी के अध्यापकों के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसी ने विषय विशेषज्ञ से हिंदी की शब्दावली प्रयोग करने का आग्रह किया । विशेषज्ञ क्रोधित हो गयी और कहने लगी कि आधुनिक तकनीक को हिंदी में व्यक्त करने के लिए एक तो उचित शब्द नहीं हैं दूसरे इनका प्रयोग हास्यास्पद लगेगा साथ ही लोग समझेंगे भी नहीं । फिर उनके पास कृत्रिम अनुवाद के कुछ शब्द थे , क्रिकेट के लिए मज़ाक में कहा जाने वाला हिंदी वाक्य था , कम्प्यूटर के लिए 'संगणक' भी था । अंग्रेजी माध्यम हिंदी में आये प्रशिक्षुओं ने विशेषज्ञ की हाँ में हाँ मिलायी और उनके मज़ाक को ईंधन ही दिया । 

हम कोई भी शब्द जब पहली बार सुनते हैं तो उसके प्रति अनजानापन होना स्वाभाविक ही है । लेकिन शब्दों के लगातार प्रयोग से हम उनके अर्थ के स्तरों और विस्तार आदि को समझते हैं फिर वह हास्य का कारण नहीं लगता । यदि हम कंप्यूटर के लिए संगणक शब्द का प्रयोग धड़ल्ले से करते तो यह हमारी आम बातचीत का हिस्सा बन जाता फिर यह उदाहरण के तौर पर कभी नहीं आता । भाषा में आम प्रयोग और अभ्यास का महत्व है । यहाँ तमिल भाषा का उदाहरण उपयुक्त होगा । द्रविड़ परिवार की इस भाषा में अंग्रेजी के शब्दों के तमिल प्रतिरूप उपलब्ध हैं और आम बोलचाल में अंग्रेजी शब्दों के बदले तमिल शब्द ही प्रयोग में लाये जाते हैं । और सबसे अच्छी बात यह कि ऐसा करने को हीन नहीं माना जाता और बोलने वालों का मज़ाक नहीं उड़ाया जाता ।  हिंदी में देश की अन्य भाषाओं के साथ साथ विदेशी भाषाओं के शब्द भी खूब सारे हैं और वे दूध और पानी की तरह मिले हुए हैं । उन पर हिंदी का व्याकरण भी उसी तरह से काम करता है जैसे हिंदी शब्दों पर । हिंदी ने यह लचीलापन स्वीकार किया लेकिन हिंदी के शब्दों को अंग्रेजी से बदल देने की यह क़वायद और जल्दबाज़ी इस तर्क के साथ स्वीकार नहीं की जा सकती कि भाषा में शब्द नहीं हैं और शब्द हैं तो जुबान पर चढ़ने लायक नहीं हैं । इस आधार पर भाषा को कमतर साबित करना और ख़तरनाक कार्य बन जाता है । मलयालम भाषा में अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग आम हैं । कुछ शब्द तो ऐसे हैं जिनके मलयालम समकक्ष खोजने में पसीना छूट जाए लेकिन इसमें भी 'ट्रेन' के लिए 'तीवंडी' शब्द का ही प्रयोग होता है और वक्ता हास्य का पात्र नहीं बनता । 

भाषा की सीमा बताने वाले शब्दों के प्रयोग संबंधी अपनी सीमा को ढाल के रूप में सामने रख देते हैं । इससे उनके लिए हिंदी को त्यागने के झूठे आधार निर्मित हो जाते हैं साथ ही अपने को विशेष प्रदर्शित करने का अवसर भी मिल जाता है । इस तरीके से हिंदी को बरतने वालों ने हिंदी में अपने सहज रूप से अभिव्यक्त करने वालों में हीनभावना भरनी शुरू कर दी है । नुकसान हिंदी का होना ही है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

स्वागत ...

आइडिया ऑफ इंडिया और बकरीद

यात्राओं में अक्सर कुछ न कुछ ऐसा दिख जाता है जो याद रहने लायक हो , एक मुस्कान ले आये या फिर चारों ओर की कड़वाहट के  बीच कोई मधुर ...