जुलाई 13, 2021

यात्राओं के नाम


 

 

 हमारे आसपास ऐसे कई दर्रे होते हैं जिनमें घुस जाएँ तो एक अलग ही दुनिया खुलती है । एनीमेशन फिल्मों ने ऐसे विचारों को खूब भुनाया है और उनकी मार्फत हमारे मन के दर्रे भी खुलते हैं और अलग रोशनी आती है । लेकिन ज़्यादातर बार हम उसे नज़रअंदाज़ कर के आगे बढ़ जाते हैं कि यहाँ क्या ही होगा’ ! 

 

घूमना फिरना एक लग्ज़री है उसके दृश्य परिदृश्य , चिंतन और विचार सब इसी दायरे में आते हैं । जहाँ दो रोटी का भी प्रबंध न हो वहाँ घूमने फिरने के मायने मारे मारे फिरनेकी तरह होते हैं । उस स्थिति मे में , मैं अपने एक्सलोरकरने को एक अश्लील गतिविधि मानता हूँ ।

 

आजकल ये किस्से बड़े आम हो चले हैं कि यात्राओं ने मेरी दुनिया बदल दी । इससे बड़ा झूठ कुछ नहीं होता है । या कम से कम यह कह ही सकते हैं कि जितनी बड़ी संख्या में लोग यात्राएँ कर रहे हैं उस अनुपात में ये दुनिया बदलनेवाला काम नहीं होता । हाँ सीखना जरूर होता है लेकिन वह सीखना किसी भी यात्रा के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा होता है । नदी का पानी समुद्र तक पहुँचते पहुँचते अपने साथ बहुत कुछ ले जाता है तो उसमें कुछ अनोखा नहीं । यह कई बार बिना यात्राओं के भी हो जाता है ।

 

ईट प्रे लव’, ‘नीलाकाशम पच्चाकडल चुवर्णभूमिऔर जिंदगी न मिलेगी दोबाराजैसी फिल्में व अपनी यात्राओं को मैं और कुछ नहीं बस अपना खर्चा उठा सकने वाले लोगों द्वारा अपने यंग एडल्टहुडको खींचते जाने की कवायद मानता हूँ । (फिल्मों के नाम बस प्रतीकात्मक हैं । हो सकता है आपके ज़ेहन ज्यादा और बेहतर यात्रा वाली फिल्में हों )

 

मैं दो साल से ज्यादा अवसाद में रहा लेकिन उसे कम करने में यात्राओं ने कुछ नहीं किया । मुझे याद है, मेरी एक सहयात्री ने कहा था कि जब तक तुम्हारा मन शांत नहीं होता और तुम्हारी आँखों में वह अशांति दिखती है, तबतक चश्मा लगाया करो ! वाकई उन दिनों की तसवीरों की बेचारगी साफ दिखती है जिसे मैं यात्राओं की मन को शांति न पहुँचा सकने वाली विफलता ही कहूँगा ।

 

मैंने जो थोड़ी बहुत यात्राएँ की उसमें लड़कियों को घूमते देखा लेकिन औरतें नहीं के बराबर दिखी । वही लड़कियाँ थी जो अपने घर से बाहर पढ़ रही हो या फिर घर से झूठ बोलकर बाहर जा सकने की स्थिति में हो । हालाँकि, वे अपनी स्वतन्त्रता जिस तरह से जीती हैं उसे देखकर कल्चरल शॉक लगने की प्रबल संभावना रहती है लेकिन यही वह बात है, जिसके लिए वे निकलती हैं । लड़के और लड़कियों के घूमने में मुझे यही मूल फर्क दिखता है ।

 

एक बार किसी ट्रेकिंग पर एक इज़राइली नागरिक मिला । वह कहने लगा कि उसके देश के लोग आवश्यक रूप से घूमने निकलते हैं वेकेशनउनके जीवन का अनिवार्य अंग है । लड़कियाँ पढ़ने लिखने और काम करने के सिलसिले में बाहर रहती हैं या उसका बहाना बनाकर झूठ बोल सकती हैं लेकिन औरतों के लिए यह असंभव होता है । उनके लिए वेकेशन तो नहीं ही है साथ ही घूमने के लिए झूठ बोलने वाली सुविधा भी नहीं रहती है । मेरी माँ जैसी औरतों की यात्राएँ रिश्तेदारी में होने वाले विवाह आदि कामों, इलाज और धार्मिक यात्राओं तक ही सीमित हैं । इसलिए दामाद के पैसे से गंगा नहाने का सपना आया’ , ‘गंगा नहाने से कोरोना माई शांत होती हैजैसी अफवाहों का मैं बहुत स्वागत करता हूँ । इनसे उन औरतों को भी ट्रेन - बस पर चढ़ने का मौका मिल जाता है जिनके लिए यह सब एक सपना हो ।

 

यात्राएँ नए लोगों से मिलाती हैं और अन्तःक्रिया के लिए अवसर का निर्माण करती हैं । कबीर की भाषा पंचमेल खिचड़ी क्यों है यह समझना आसान हो जाता है ।

 

1 टिप्पणी:

स्वागत ...

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